काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"

श्रद्धांजलि


श्री राजवीर जी त्यागी और मेरा सानिध्य १९८० -१९९० तक रहा, इस बीच जो हमारा उदेस्य खेतड़ी ताम्र संकुल की खदान व संयन्त्रों में काम करने वाले श्रमिक , अभियंता , टेक्निशयन, और कार्मिक व्यक्ति वगैरा को एक ऐसा साझा मंच प्रदान करने का था , जहाँ वे अपनी घरेलू , मानसिक , शारारिक , सामाजिक , वैचारिक , व्यवसायिक अनुभूति एवम अनुभव को अपनी अभिवक्ति दे सके । प्रयास अनूठा था किन्तु कार्य के प्रति श्री राजवीर जी का समर्पण , प्रतिबद्धता और क्षमता में ही थी की हमने इसको जीवंत रूप दिया और हिंदी साहित्य परिषद का निर्माण हुआ । फ्रेंच हॉस्टल की छत पर एक जाजम पर श्रमिक से प्रबंध निर्देशेक तक वैठने शुरू किये और अपनी कविता और लेखन का पठान और वचन करते रहे । इस प्रयास का मूल उद्देश्य उद्योग में व्यक्तियो के बीच समरसता का प्रचार करना था । श्री राजवीर जी के कुशल संयोजकतव में अनेका अनेक कार्यक्रम किये गये और मरुगंधा का संपादन व प्रकशन भी कराया गया । इन प्रयासो में हिन्दुतान कॉपर लिमिटेड के प्रबंधन की रूचि रही और प्रतोसाहन मिला ।

श्री त्यागी जी स्वमं श्रद्धा की प्रयाये थे , उनको श्रद्धांजलि देना सागर का जलाभिषेक करने के सामान है । मेरे पास उनकी स्म्रतिया है जो पल पल मुझे उनका स्मरण दिलाती है । वो कितने पास थे, कितने दूर थे ये तो में नही जानता लेकिन वे मेरे थे । अन्य मित्र जो बिछुड़ गए श्री भक्त प्रकाश वर्मा और श्री इन्दर कुमार जी कक्कड़ और इनका विछोह भी हमें सहना पड़ा । इनका विछोह भी मात्र स्म्रतिया बन कर रह गया ।

कविता लेखन मैं हमारी सबकी अलग - अलग विद्या थी जिसमे यही प्रयास था की कही कुछ कहा जाये जो भोगा है । और श्री त्यागी जी में ये सामर्थ्य था की वह हमे साथ लेकर चले । यही मेरी स्मरंणजली है - उनकी आत्मा जहाँ कही भी हो शांन्ति से रहे और संभव हुआ तो अगले जीवन में मिलने का प्रयास करे फिर नए आयाम के साथ ।

"आप त्यागी थे त्यागी बन कर चले गए ।
हम अनुरागी है , अनुरागी बनकर रह गए ॥ "

- जगमोहन जावलिया

अचल सम्पदा ४५-एफ , नया विस्तार , सुभष नगर पूर्व ,
भीलवाड़ा राजस्थान - ३११००१। ,
दूरभाष : - ०१४८२-२६४६१६ (र०) , ९४१३२६५६१६ , ९४६०३५३५६९
दिनांक : ११ सितंबर २०१६

अंकल , आपके शब्दों ने हीं मुझे वाणी दी है ! मैंने बचपन में आपके द्वारा लिखे को पढ़ कर अनेको इनाम जीते! आपके आशीर्वाद से अब स्कूल कालिज में पढ़ता भी हूँ , ९० मिनट्स निरन्तर बोलने में अब डर नहीं लगता , सब आपका आशीर्वाद है !!

- लोकेश अग्रवाल

फरीदाबाद
दिनांक : ०९ सितंबर २०१६

कविवर श्री त्यागी जी के निधन के समाचार ने मुझे झंझोर कर रख दिया उनके स्वर्ग रोहण की खबर ने मेरे मन में एक बहुत बडा खाली स्थान छोड़ दिया है। त्यागी जी मेरे गुरु, मित्र, पथ प्रदर्शक अभिवावक थे मैंने उन्हें हमेशा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए पाया है। उनकी कविता अन्याय के खिलाफ लड़ रहे मनुष्य को सहारा प्रदान करती है उनकी कविता दुनिया में व्याप्त असंगितियों और विसंगतियों को स्वर देती रही, त्यागी जी का मन निश्छल, निष्कपट था वह मेरे काव्य गुरु तथा प्रेरणास्त्रोत थे रासायनिक विश्लेषण का कोई जबाब नहीं था भगवान उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे।

- चन्द्रपाल सिंह ' निरंकुश '

७३३, सिल्वर क्राउन , गाँधी पथ (पश्चिम) ,
लालर पुरा , वैशाली नगर जयपुर ,
दूरभाष : - ८०५८८८००८०
दिनांक : ०८ सितंबर २०१६

सृजन के सजग प्रहरी को मेरा शत शत नमन !
त्यागमय जीवन पाकर वे , सृजन - पठन सदा करते रहे !
जबतक रहे इस धरा पर , औरों के लिए जीते रहे !!
मंच संचालक , प्रखर वक्ता , शब्दों के धनी बने रहे !
कर्मठ जीवन ,स्पष्ट विचार , लोगों के दिल में बसे रहे !!
धन्य हो गई ताम्र नगरी , जहाँ शब्द सृजन करते रहे !
सेवारत रहा इनका जीवन , सद्कर्मो से आदर पाते रहे !!
राजवीर सिंह त्यागी का त्याग ,साहित्य जगत भूल न पायेगा !
सृजन के इस सजग प्रहरी को , हर नवांकुर शीश झुकायेगा !!
इनकी याद में हम सृजनकर्मी ,श्रद्धा शब्द सुमन चढ़ाते हैं !
साहित्य जगत के इस सितारे को, हर दिल में हम बसाते हैं !!

- भरत मिश्र प्राची , साहित्यकार व् पत्रकार जयपुर

फ्लैट -२ , सत्यम , शिवम् -शिवम् , १२०-१२१ , जयकरणी नगर ,
नेवारू रोड , झोटवाड़ा। जयपुर - ३०२०१२
दूरभाष : - ०१४१-२४६९३६८
दिनांक : ०६ सितंबर २०१६