काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - भरत मिश्र प्राची

कविता - दुनियादारी

सदियों से गड़ा शिलान्याश का पत्थर
बन गया वहीँ अब रास्ते का पत्थर।
फाइलों के पर अब झरने लगे हैं
रास्ते में हैं अभी बहुत से दफ्तर ।

जब तक जिन्दे थे ज़नाब
दूध भी देने कोई आये नही।
मर गए तो उनके क़ब्र पर
माखन लगा रहे हैं सभी।

कल थोड़ी सी जगह मांगी
सर छिपाने के लिए।
आज वे अंदर
मैं हो गया बाहर।