काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

कविता - प्रज्ञप्ति

एक तिल की भी जगह
खाली नहीं होती
एक सीढ़ी पर हजारों लोग होते है
भेड़ियों से भी अधिक खूंखार,
पल में चीर डालेंगे
सीढ़ियों के पास मत जाना
भटक कर बीहड़ों में
चाह चढ़ने की मिटा लेना,
आदमी के पास मत जाना।

कभी उप्लाव्धियां खाली नहीं होती
हजारों लोग अपनी कुण्डली में
बन्द रखते है
साँप से ज्यादा विषैले लोग
खून का पानी बना देंगे देह कंचन गला देंगे
कभी उप्लब्धियों के पास मत जाना
असफल कोशिशों को
चाह चढ़ने की उठा लेना
आदमी के पास मत जाना।

सुरुचि, ढाली नहीं जाती
जन्म के साथ उगती है
जिसे संगीन पहरों में
सुरक्षित लोग रखते हैं
आग से ज्यादा जलाना जानते है लोग
जलाकर खत्म कर देंगे,
देह क्या है
आत्मा को
भस्म कर देंगे
कुरुचि के गांव रहकर
चाह गढ़ने की मिटा लेना
आदमी के पास मत जाना।