काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

कविता - सूचियाँ

हां, तुम्हारा नाम सूची में लिखा है
इसलिये संतुष्ट हो तुम ,
और तुम ही क्यों
तुम्हारे साथ के सब लोग
कागज पर अंके हैं ,
सूचनाओं में टके हैं
इसलिये वह भी सूखी है।

सूचियाँ जो कि तुम्हारे हाथ में हैं
होठ पर हैं
घर टंगी है
सूचियाँ चाहे किसी भी
रूप की हों, रंग की हो
पर तुम्हारे उर बसी है।
जानता हूँ , है जगह खाली बहुत
उनमें अभी भी
किसलिये फिर तुम
हमारे नाम के प्रवेश को रोके हुए हो
किसलिये मेरी गति रोके हुए हो।

समझता तो हूँ
कि इसका राज क्या है
नाम मेरा रोकने की क्या वजह है
यों उचित भी है
तुम्हारी सालियां , साले भतीजे
मौसियों की पुत्रियां और पुत्र
प्रेमी/प्रेमिकाएं आदि
उनमें खप सके,
सूचियां जिससे तुम्हारे वंश के
सब गुप्त राजों, धूर्तताओं
और हितों को
युगों तक
बिल्कुल सुरक्षित रख सके।