काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

कविता - तथस्ट

इतने बड़े मेले में
केवल एकाकी / मैं
लोग एक दूसरे की आँखों में
आँखे डालते हैं,
विवशता के बासी बिम्ब
सालते है,
मैं इन बिम्बो से
बचने की कोशिश में
अकेला भटकता हूँ ,
डरकर बार -बार आँखे बंद करता
और साहस जुटाकर
फिर - फिर खोलता ,
बनियों को
समस्याओं के समाधान बेचते
अंधे लोगों को नकली आँख चेपते
देखता हूँ ।

नकली स्तनों वाली लड़की
अमेरीकन पाउडर व्योसाती हैं
चालू धुन गाती हैं ,
वीर्यहीन लड़के अपनी नपुंसकता
नंगी करते हैं,
आहें भरते हैं
मेरी पुतलियों पर
जैसे टीयर गैस छा जाती है
बिम्बो की दुनियां
वैश्या नजर आती है,
लगता है लकड़ी की टागों पर
असहाय खड़ा हूँ ,
मेरी छाती गायब है
मैं घबराकर अपनी आँखे
खोल देता हूँ
फिर वही मेला
एकाकी मैं
फिर वही बनिये,
नकली स्तनों वाली लड़की
वीर्यहीन लड़के
फिर वही टीयर गैस
मैं घबरा कर
अपने आप में सिमट जाता हूँ।
अर्थात
तटस्थ हो जाता हूँ।