काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

कविता - अर्थ शास्त्र का विकास

न आसरा -औसरा न धोती -लंगोटी थी
तकदीर उसकी भी मेरी सी खोटी थी ।

मैं चाहता था एक रोटी ,...... फिर एक धोती फिर ....
वह मांगता था पहले मकान
मैंने कमायी एक रोटी , एक धोती
उसने जुगाड़ा एक मुकम्मल मकान
मुझे छत के नीचे रात गुजारने की इजाजत दी
आधी रोटी , आधी धोती बदले मैं छीन ली
अब उसके पास आधी रोटी , आधी धोती भी थी
मुकम्मल मकान के साथ - साथ।
धीरे - धीरे मेरी रोटी छोटी, उसकी मोटी होती गई ,
उसकी धोती , धोती , मेरी लंगोटी होती गई।
फिर एक और रोटी - धोती वाला
उसकी छत के नीचे रात काटने लगा
रोटी - धोती, आधी बांटने लगा
फिर एक और ..... एक और .....एक और .....
अब उसके पास फालतू रोटी थी/फालतू धोती थी
वह करने लगा रोटी धोती का व्यापार
खरीद लिया रोटी का पेड़ /धोती का पेड़ /हवा का खजाना ,
मांस की मंडी /पानी का गोदाम
रोक दिया हमारा छत के नीचे रात काट पाना।
अब वह महान है/ हमारी दुनियां का भगवान है
यही समाज शास्त्र और अर्थशास्त्र का विकास है
हमारी हर पीढ़ी का पूरा इतिहास है।