काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

कविता - आहत दायित्त्व बोध

समय की छाती पर
गिरा दिया किसी ने
भीमकाय कैक्टस
पीढ़ी पर रोप दिया गतिरोध
घायल है युग -बोध
शोषण, ऐनाक्री का सेवक
वह क्रूर गिद्ध / इस युग के प्रमथ्यु का
निगल पूर्ण ह्रदय भाग / चबी हुई छातियों
खाली - खाली पेटो
उधड़ी हुई रानो पर
झपटता है
मेरी पीढ़ी का
आहत दायित्व -बोध
प्रमथ्यु की लाश पर
सर पटकता है।