काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

कविता - शत शत प्रणाम

हिन्दी के गर्वोन्मुक्त शिखर
अजर अमर अभिव्यक्ति - स्वर
पौरुष -ध्वज
करुणा-कान्त सरल
शिव ! तुमने निशि-दिन पिया गरल।

आज जुही की कलिका है
अतिशय उदास
व्यथित स्मृति है ' सरोज ' की
आतुर ' तुलसीदास ' ।
चल रहा लकुटिया टेक
भिक्षु अब भी झोली फैलाकर
इलाहाबाद के पथ पर
अब भी तोड़ रही वह बेबस
पत्थर

युग के दधीचि पीड़ा के कवि
नव -युग द्रष्टा , सृष्टा युग - रवि
हे तपो पूत त्यागी अकाम
हे सूर्यकान्त तुमको प्रणाम
हे ज्योति-पुंज शत -शत प्रणाम।