काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

कविता - कोई साथ नही है

कोई साथ नहीं है
बात महज इतनी होती तो
शायद कोई बात नहीं थी
आज प्रश्न है ,
अपनी बाहें गद्दारी पर अमादा है
अंगारे सी सी घूर रही है दोनों आँखें
अपने ही विपरीत हो गयी अपनी रसना
कान दूसरों की बातों पर चले गये है
दसों उँगलियाँ आक्रामक मुद्रा में
तानी हुई है
मास पेशियां बिना वजह
विद्रोही बनी हुई है
बुनता है मस्तिष्क स्वतः ही
षड़यंत्रों का ताना -बाना
नामुमकिन निज को समझाना
असहयोग पर उतरा है मन
नथुने सांस बन्द करने की
धमकी देते
पांव पराये हो जाने का
अवसर खोज रहे है
मेरे अपने हाथ नहीं है
कोई साथ नहीं है।

कोई साथ नहीं है
बात महज इतनी होती तो
शायद कोई बात नहीं थी।
आज प्रश्न है ,
साये से बचती है किरणें
हवा दूर से कतराती है
चील मुंडेरों पर बैठी है
नभ कौए मँडराते है
आँगन में पसरा है पतझर
पड़ा देहरी पर विषाद है
छत पर रोदन करती बिल्ली
घर के बाहर शोक मग्न है
कुत्तो के दल
चलता है दुर्भाग्य अगाड़ी
पीछे दौड़ रहे है दुर्दिन
यहाँ - वहाँ
हर दिशि है असुगन
शह से खाली कदम नहीं है
किस कोशिश में मात नहीं है
कोई साथ नहीं है।