काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

कविता - खैरियत का ख्याल

भेड़ियों की मांद में भी
मैं सुरक्षित हूँ
तुम्हे भ्रम है
हुआ क्या /जो अभी तक
बख्श रक्खी है उन्होंने
हड्डियां और मांस
या कि तन का खून ज्यों का त्यों।

वह भी केवल इसलिये केवल
कि , मैं
खीसें निपोरे जी रहा हूँ ,
या प्रशस्ति गा रहा हूँ
शायद आप का निष्कर्ष
कि मेरी भुजाओं में
भेड़ियों से जूझने के योग्य
दम - खम है

नहीं है वास्तविकता
मात्र धोखा है मतिभ्रम है
भेड़ियों की मांद में भी
खैरियत की बात
ककर्ष व्यंग्य भर ही है ,
तलुवे चाटकर खीसें दिखाकर
कीर्ति गाकर
याकि फिर
आंसू बहाकर
चैन से जीवन बिताने की
कदाचित -कारगर तदबीर होती ,
तो दुनियां की भला
इतनी बुरी तस्वीर होती।
भेड़िये भी
तब तलक ही बौद्ध होने का
दिखावा कर रहे है
तब तलक इस गात से
श्रम -बिन्दु अविरल
भर रहे हैं।
पोषित हो रहा है स्वार्थ
पुलकित हो रहा है गात
किश्तों में
मिटाया जा रहा हूँ मैं ,
बड़े ढंग से
खपाया जा रहा हूँ मैं।
यह सुफल भी
मैं तभी तक पी रहा हूँ
तब तलक कि काम उनके आ रहा हूँ
उपयोगिता का साम्य
जब भी गड़बड़ायेगा
भेड़ियों का रूप असली दीख जायेगा
क्रूरता अब भी नहीं है
शून्य तो उनकी
महज थोड़ी -बहुत कम है
मेरी खैरियत का ख्याल
केवल आपका भ्रम है

भेड़ियों के रहम पर
मेरी तरह जीना
बेबसी भरहै
महन संत्रास है ,
खैरियत का ख्याल
उस विद्रूप है उपहास है
भेड़ियों के बीच
आत्मा रहती नहीं है ,
देह रहती है
थकी निचुड़ी
ओढ़कर , नोंची हुई चमड़ी
साहस, आस्था, स्फूर्ति
या कि निज -सम्मान
खोकर /सांस लेना मात्र
मुर्दागात होकर
कितन भयावह है , दुखद है
जो भी कहा जाये
इसे काम है
मेरी खैरियत का ख्याल
केवल आपका भ्रम है