काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

कविता - कलम सृजना और साधना

कमल,
कभी नहीं मलती पाउडर
सजा - धजा दिखना
और स्याही में डूबकर लिखना
हो ही नहीं सकता
साथ - साथ ।
संभावना खोजती आँखें
रह ही नहीं सकती
कजरारी
उनसे, बेचैनी और बेकरारी
टपकना जरुरी है
रीतापन
अनावश्यक मज़बूरी है
जिनमे, अंकुर बसाया जा सके
पाल - पोस कर
वृक्ष बनाया जा सके
अगले पड़ाव की तैयारी के दौरान
सुस्ताया जा सके ।
सृजना , कभी नहीं रंगती अपने बाल
पकने का इंतज़ार करती है,
निपट काले बालों से भी
खिचड़ी बालों सा
व्यहवार करती है
चेहरे पर झुर्रियां बोती है ,
माथे पर बल उगाती है
अपनी सुध खोकर जीती है
मलियानिल उगलती है
मीथेन पीती है
रुंधते गलों को राहत
और मरणासत्र फेफड़ों को
प्राण देती है/ और आड़े वक़्त में
इन्ही से ,
धोंकनी का काम लेती है

साधना ;
चमचमाते मंगलसूत्र पहन कर
वर नहीं तलाशती
स्वयं बुनती है सूत्र
और मंगल के लिए
आखिरी सांस तक
हाथ-पाँव मारती है
सुविधाओं के सन्मुख
पसरती नहीं हैं
टूटती फूटती है
संवरती नहीं है
हथकंडों का मूल्यांकन
मुखोटों की सनद
और भीड़ की स्वीकृति
बटोरती है केवल विकृति
क्योंकि साधना रास्ता भर है
उप्लभ्धियों से बेखबर है
साधना, पाना नहीं
खो जाना है
अपने सिवाय सबका हो जाना है