काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

गीत और ग़ज़ल - मरना है हमें

एक भी नागा नहीं , हर रोज मरना है हमें ,
दोस्ती का जायका मालूम करना है हमें।

इस इमारत में खड़े हैं बीच की मंजिल पे हम ,
सीढियां ऊपर भी हैं लेकिन उतरना हैं हमें।

फर्क कुछ पड़ता नहीं मधुमास हो , पतझार हो ,
दो घड़ी खिलना है आखिर तो बिखरना हैं हमें।

भोंथरी हो या तेज हो कैंची गले लगकर मिले ,
जिन्दगी को बेतुके ढंग से कतरना है हमें।

हैं बड़े भरी कई पत्थर हमारे आसपास ,
बाद एक के दूसरा सीने पे धरना हैं हमें।

देखिये तकदीर वादी खुद ही जज , खुद ही वकील ,
जुर्म तय , तय है सजा अब क्या मुकरना है हमें।

पास में नासूर के बैठे हैं , क्या शिकवा करें ,
उम्र से अपनी यही सुराख भरना है हमें।

नाव जिसका आसरा था पूछ बैठी धार में ,
डूबना फौरन है या कुछ और तरना है हमें।

कीजिये रुखसत कि अब होने लगा है झुटपुटा ,
दोस्त का कुंचा है जिसमें से गुजरना है हमें।

ईट है काफी पुरानी , पास है लौनक का घर ,
देखना यह कि कितने दिन में गिरना है हमें।