काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

गीत और ग़ज़ल - हुआ होगा

किसी भी कामना कामना जब कहीं रंजन हुआ होगा।
कई संभावनाओं का हनन विघटन हुआ होगा।

किसी का प्राण -पाखी कसमसाता है सुनिश्चित है
कहीं पर आज, फिर से , कौंच का भेदन हुआ होगा।

कई स्मृतियां सिरहन हुअन बिछुड़न , मिलान की हैं ,
कभी पाहुन मेरे कंधे पै कोई मन हुआ होगा।

अकारण कब किसी आधार का तिरस्कार होता है ,
किसी संकेत पर सहयोग पर से विचलन हुआ होगा।

अखंडित आस्था , मानक सुरक्षित है नहीं कोई
समर्पण का कहीं पर घोर अवमूल्यन हुआ होगा।

कई विश्वास विष पीकर मरे है नयन के सम्मुख ,
कहीं षणयंत्र -सागर का सतत मंथन हुआ होगा।

अमर्षण ही नियति है अब सुगन्धा चेतनाओं की ,
कहीं चन्दन दहन और नाग का वन्दन हुआ होगा।

कहीं अवसाद पथराया हुआ है यदि कई दिन से ,
विह्ळ शायद कोई रूठा हुआ कंगन हुआ होगा।

अगर पद गीतिका का एक भा जाये समझ लेना ,
कलम का वेदना से अनवरत सिंचन हुआ होगा।