काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

गीत और ग़ज़ल - मन

कभी भरकर हुआ रीता , रीत कर भी भरा है मन
तरीके से जिया होगा , सलीके से भरा है मन।

कभी हार में शायद रहा सत्कार भी करता ,
मगर बनकर छुरा गर्दन पे भी आकर गिरा है मन।

न खिड़की है , न दरवाजा , न रोशनदान है इसमें
कहीं होगा मकां शायद यहाँ तो मकबरा है मन।

वोरोधों में रहा अविचल , धमाकों में बड़ा निर्भय ,
मगर पुचकार से डरकर बड़ा छिपता फिरा है मन।

कली और फूल चुन लो , नोंच डालो पत्तियां सारी ,
सुबह तक सूख जायेगा , अभी कुछ -कुछ हरा है मन।

मिले आराम कुछ कोई कलेजा चाक कर जाये ,
बड़ी तकलीफ में होगा अभी तक अधमरा है मन।

बने जब मित्र शत्रु उस जिबह के वक्त उस लमहे ,
कहां क्या क्या घटा होगा , उसी पर तवसरा है मन।

न मतला है , न मकता है , ध्वनित अनुप्रास हों जिसमें ,
बहुत पहले था स्थायी मगर अन्तरा है मन।