काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

गीत और ग़ज़ल - सुविधा के पति

कुछ होते ही , जो होने की अति हो जाते है।
हर सुख के स्वामी , सुविधा के पति हो जाते है।

जिन्हें आगई कला उछल कर कंधे चढ़ जाने की ,
कंधों पर चल जाने कर मनचाही हद तक बढ़ जाने की।
जी लेते है बिना हिचक जो रिश्ते अदल-बदल कर ,
जिन्हें महारथ मिली समय की धड़कन पढ़ पाने की।
ऐसे लोग कौम भर की नियति हो जाते है ,
पीढ़ी भर के करे धरे की परिणिति हो जाते है।

जिसको चाहें जब अपने अनुकूल ढाल सकते हैं
जब चाहें गोरस से मख्खी सा निकाल सकते हैं।
यह इस सीमा तक कृतज्ञता ढोने के आदी हैं
सरेआम उपकारों की पगड़ी उछाल सकते हैं।
ये युग, फिर युगधर्म अन्ततः संस्कृति हो जाते हैं,
देश नहीं दुनिया भर की सम्पत्ति हो जाते हैं ।

इन्हे बड़ा प्रिय जाहिल जनता में जागृति लाना ,
रोज लोकहित का कोई भारी अभियान चलाना।
सेवा आदत में शुमार , पेशा है मानवता के ,
पी - पी कर दुःख - दर्द देह से नीलकंठ हो जाना।
ये मानस से शास्त्र वचन से श्रुति हो जाते हैं ,
सारे धर्म ग्रंथ इनकी अनुकृति हो जाते हैं।

इन पर प्रकट अतीत नियंत्रण एक वर्तमान पर ,
स्थापित है अनुशाशन आगत के संविधान पर।
ये अतिइन्द्रीय -जीव मनुष की योनि में होकर भी ,
भारी पड़ते है विधि पर , विधि के सारे विधान पर।
ये चिन्तन का चित्त , मनन की मति हो जाते है ,
कालपुरुष हैं , देशकाल की गति हो जाते है।