काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"





काव्य संकलन - राजवीर त्यागी

गीत और ग़ज़ल - कमाल कर गये

सचमुच आप कमाल कर गये
जबसे बड़े बने तुम तबसे हल ही हल है शेष
शर्म के मारे , सभी सवाल मर गये
सचमुच आप कमाल कर गये

खुशहाली आई फिर भी मजबूरी बनी रही ,
रोटी की ओठो से यूहीं दूरी बनी रही।
सचमुच ऐसा ही विकास असली विकास है ,
इस उपलब्धि पर सारी दुनिया हताश है।

रीतों को औधाकर, भरे हुओं को और निहाल कर गये ,
सचमुच आप कमाल कर गये।

जीते आप सदी अगली में, हम आदम युग में जिन्दा है ,
हमें पता है आप हमारे जीने भर से शर्मिन्दा हैं।
नीचे नारो की फसले हैं , ऊपर आआश्वाशन का साया ,
बेचारा ब्रह्मा भी ऐसी मोहक सृष्टि नहीं रच पाया।

फूलदान में हँसते कांटे, कलियों को बदहाल कर गये ,
सचमुच आप कमाल कर गये।

दीन -दुःखी के दुःख -दर्दों को केवल तुमने पहचाना है ,
सारे धन्धे छोड़, देश सेवा का व्रत मन में ठाना है।
कठमुल्ला पूरी पीढ़ी के करते तुम संचालित धागे ,
देश तुम्हारे धकियाने से बढ़कर आया इतना आगे।

जयकारो में निधियां बाटीं , बिमुखों को कंगाल कर गए
सचमुच आप कमाल कर गये।