काव्य संकलन - राजवीर त्यागी
    संकल्प, सार्थक एवम अक्षय प्रयास "दिवंगत श्री राजवीर त्यागी की यादो को जीवित रखने का"

श्रद्धा सुमन

2016

धूमिल ने कहा था की कविता भाषा में आदमी होने की तमीज़ है लेकिन आदमी होने की तमीज़ का विकास वही व्यक्ति कर सकता है जिसके पास जिंदगी को भीतरी तहों तक देखने का तथा आदमी के विरुद्ध चलने वाले षडयंत्रो को समझने की पैनी दृष्टि हो । ऐसी दृष्टि से संपन्न कवी ही अपनी कविता को समाज को सही दिशा देने लायक और मानव विरोधी व्यवस्था को बदलने लायक कारगर हथियार बना सकता है ।

कवि राजवीर त्यागी के पास वह धारदार दृष्टि है जो आदमी के खिलाफ चल रही साजिशों के मूल को पहचानती है । उनके लिए कवि - कर्म मूल्यरहित होती दुनिया में आदमी की प्रतिमा को टूटने से बचाने और मानवीय व्यवस्था की स्थापना का निष्ठहपूर्ण प्रयास है ।

राजवीर त्यागी का कवि सरल बिम्ब और प्रतीकों के माध्यम से अपने तरीके से अपनी बात कहने सहमत हो नही रखता प्रत्युत वह शब्द की सामर्थ्य को पहचाने और उससे हथियार की तरह इस्तेमाल करने में भी दक्ष है और यही दक्षता राजवीर त्यागी को समर्थ और प्रासंगिक कवि भी बनाती है । यह भी निश्चित है की राजवीर त्यागी कविता के माध्यम से उन निष्कर्षों तक पहुचना चाहते हैं जो बेहतर जीवन के लिए जरुरी है :

अब हम चाहते हैं । शब्दो को नपुंसक होने से बचाना संगतपूर्ण निष्कर्षो तक पहुचाना । तब बहस में उलझने के बजाये घाव के इलाज के साथ- साथ जरुरी होता है , हाथ में पत्थर उठाना ।